Ideology, Which Kills EP 1 : Marichjhapi Massacre

आखिर कब तक हम सहेंगे?

पाकिस्तानी फौजिओ घ्वारा भारतीय सरहदमे घुसकर भारतीय सैनिको पे किये गए हमले में 5 भारतीय जवान सहीद हो गए. इसके बाद पुरे भारतमे बवाल मच गया है. नेताओमें एक होड़ सी मची है बयां देने की. कुछ लोग जानबुजकर देश के खिलाफ बयां देते है बाकि लोग उनपे बयां पे अपने बयां से हमला करते है.कई लोग सडको पे उतर आते है, नारे लगते है, नेताओ के पुतले जलाते है, दुश्मन का राष्ट्रध्वज जलाया जाता है. ऐसा लगता है जैसे देशमे क्रांति आने वाली है. हर लोग लड़ने को तैयार हो गए है. पर थोड़े दिन बाद सब कुछ ख़तम. मामला शांत होते ही लोग अपने अपने काम में लग जाते है.

ऐसी घटनाए एक बार नहीं बार बार होती है. जब देशमें कोई जगह आतंकवादी हमला होता है, ये सबकुछ होता है. जब चीन के जवान गुस आते है, ये सबकुछ होता है. पाकिस्तान हमला करता है, ये सब कुछ होता है. पर उस सबका नतीजा क्या निकलता है? कुछ नहीं. जीतनी बार ये सबकुछ होता है. संसदमे चर्चा होती है. प्राइम मिनिस्टर, विपक्ष के नेता सभी की और से बयां आते है. एक्शन कोई नहीं उठाता.

जिस देशको गालिया दी जाती है. उसी से अब बातचीत शुरू होती है. उनके नेताओको यहाँ बुलाया जाता है. करोडो रूपये उनपे खर्च किये जाते है. सभी मामले को बातचीत से सुल्जाने की बात होती है. जिस पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाये जाते थे उसी से क्रिकेट मेच खिलवाई जाती है और नारे लगनी वाली जनता उसी मेचकी महँगी टिकट खरीदकर उसका मजा उठाती है. लोग अमन की बाते करने लगते है. और इंतजार करते है दुश्मन के हमले का.

आकिर कब तक हम इस टेप को रिपीट करते रहेंगे? कब तक हम मेच खिलवाते रहेंगे? कब तक हम लोग वो मेच देखते रहेंगे? अगर हम उस मेच को देखना ही बंद कर देगे तो मेच अपने आप बंद हो जायेंगे. अगर हम इन नामर्दों को वोट की जगह चोट देंगे तो ये पुनरावर्तन जरुर अटकेगा. और एक नया दिन, नइ शुरुआत के साथ जरुर आएगा.

पाकिस्तान ने ये पहेली बार हमला नहीं किया है. उसने बार बार शांति करार का उल्लघन किय है. वो ऐसे छोटे छोटे हमले करके हमारे सेकड़ो जवान मर चूका है. पर हर बार हम उसे छोटा हमला मानकर अनदेखा करते है. और हमारी इसी गलतिका पाकिस्तान बार बार फायदा उठा रहा है. एक तरीके से पाकिस्तान भारतके साथ “साइलेंट वोर” खेल रहा है. जिसका नुकसान सिर्फ हमें ही हो रहा है, क्युकी हम उसका जवाब नहीं देते. पाकिस्तान के जवाब कभी भी भारतमे घुसकर हमला कर देते है पर हमारे सैनिको को हम उसकी मंजूरी नहीं देते. एसा क्यों? जब तक हम उनकी जमीं पे जेक उनको नहीं मारेंगे, वो बार बार हमारी जमी पे आके हमें मारेंगे. क्युकी वो लोग सिर्फ लड़ना चाहते है. कही पर भी. किसी से भी और कैसे भी.

लेखक: तेजश पटेल

पंजाब का “केन्सर बेल्ट”

पंजाब, भारतका एक समृद्ध कहा जाने वाला राज्य. कृषि उत्पादन में भारतका अग्रेसर राज्य. पंजाब के किसान भारतके दुसरे राज्योके किसानोके मुकाबले ज्यादा सुखी है.  आम तौर पर ऐसी राय देश के अन्य प्रदेशो के लोग पंजाब के बारे में रखते है. पर हरियाली क्रांति के अलावा एक दूसरी ऐसी चीज है जिसकी शुरुआत यहाँ से हुई है. भारत और दुनियाके बहोत कम लोग इस बारे में जानते है. और वो है,”  केन्सर बेल्ट “.

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                                                                                                                                                                                                                                                 पंजाब का मालवा प्रदेश, पाकिस्तान और भारतकी सरहद पर है. करीब आठ जिल्ले इस प्रदेश में आते है. पर क्यों कहा जाता है उसे ” केन्सर बेल्ट ” या फिर क्यों बना वो  ” केन्सर बेल्ट “?

दरअसल इस प्रदेश के बहोत सारे लोग केन्सर से पीड़ित है. आमतोर पर हमें हर जगह केन्सर के दर्दी मिल जाते है. पर यहाँ पे उनकी संख्या बहोत ही ज्यादा है. यहा के हर घर में आपको केन्सर का दर्दी मिल सकता है. यहाँ के ज्यादातर बच्चे शारीरिक या मानसिक तौर पर विकलांग है. यहाँ के ज्यादातर लोग किसान है. हमें बारबार ये सवाल परेशान कर रहा है की आखिर करोडो लोगोके खाने का अन्न पैदा करने वाले इन लोगो पर कुदरत का ऐसा कहर क्यों?

जब सरकारने यहा की जमीन और पानीकी जाँच कराइ तो जो नतीजे आये वो बहोत ही चौकाने वाले थे. यहाँ के पानिमे रेडियो एक्टिव तत्व पाए गए. साथमे पानी और जमिन में मिले जहरीले पदार्थो की संख्या मानी मापदंड से कही गुना ज्यादा मिली. या मान  लीजिये की उनके पिने का पानी अब जहर बन गया था. जमीन में मिले जहरीले रसायनों की वजहसे जो अन्न यहाँ पैदा होता है वोभी जहरीला ही होता है. और ऐसा पानी और अन्न खाने की वजह से यहाँ के लोग बीमार हो रहे है.

सोचने वाली बात ये है की यहाँ पे इतना सारा जहर आया कहा से? हकिकतमे देशमे जब हरित क्रांति हुई तो किसानो को फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए सरकार और  अन्य एजन्सिओने किसनोको रासायनिक खाद और कीटनाशको के इस्तेमाल सलाह दी. पर किसीने किसानोको इसके बारे में सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराइ. फलत; किसनोने ने उसका अधिकतम और जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल किया. समय के साथ ये जहर यहाँ के पानी और जमीं में मिलता गया.

आज देशकी सरकारे हरित क्रांति के फायदे गिना रही है. लोग दूसरी हरित क्रांति की बात कर रहे है. पर क्या कोई उसके दुष्प्रभाव के बारे में सोचता है? हरित क्रांति का सबसे ज्यादा फायदा जिन किसानोको मिलना चाहिए था वो ही आज नरक जैसी जिन्दगी जीने को मजबूर है.

सरकारने कई गावोमे शुद्ध पानीके लिए प्लांट लगाये है जिससे हर एक आदमीको दिनमे ४ रुपयेमे ५ लीटर पानी पिने के लिए मिल रहा है. पर क्या वो काफी है? वो लोग खाना बनाने में जो पानी इस्तेमाल करेंगे उसका क्या? जो अनाज वो खा रहे है उसका क्या? हकीकत में सरकारको इस बात पे बड़े कदम उठाने की जरुरत है. बात सिर्फ यहाँ की नहीं है. देश के कई हिस्सोमे अब ऐसेही हालत धीरे धीरे बनते जा रहे है. किसानो जागृत करने की जरुरत है. वरना आँखे बंद करके विकास करेंगे तो सफलता की और नहीं पर विनाश की और पहुँच जायेगे.

~:: तेजश पटेल ::~

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किसीकी जिन्दगीकी क्या होगी कीमत?

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दिल्ली आजकल एक लड़की पे हुए बलात्कार के मामलेमे खुब चर्चा में है. और क्यों नहीं होगी? ऐसे हेवानियत भरे कुकर्म को सुनकर कौन्चुप रह सकता है?

दिल्हीके मुख्यमंत्री शिला दिक्सित खुद एक औरत है. देश और दिल्ही के शासक पक्ष कोंग्रेस की प्रमुख सोनिया गाँधी एक महिला है जो की दिल्ही में रहती है. लोक्सभामे विरोध पक्ष की प्रमुख सुषमा स्वराज भी औरत. फिर भी दिल्ही बन गई बलात्कारियोकी नगरी.

पिछले केवल एक ही साल में ९६५ (965) बलात्कार के मामले दर्ज हुए है. ये सिर्फ रजिस्टर्ड मामले है, इसके आलावा ऐसे कई मामले होगे जिसमे लडकिया बदनामी या फिर डर, धमकी जैसी कई वजहों से पुलिस फरियाद नहीं दर्ज कराती. पुरे भारतमें शायद इतने बलात्कार कही पे नहीं होते. फिर क्यों दिल्ही जो देशकी राजधानी है वो ही बनी बलातकारीओ की राजधानी?

असल में दिल्ही भारतकी राजधानी होने की वजह से पुरे देशमे से आये पोलितिसियन और अधिकारी यहाँ पे रहते है. उनके पास बहोत ज्यादा बेनामी सम्पति होती है. उनके बच्चे भी यहाँ पले बढे होते है. अपने बापकी बेनामी कमाई को वो उड़ाते रहते है और फिर वो धीरे धीरे बेकाबू बनते जाते है. अगर वो कोई गुनाह करते है तो पर उनको रोकने वाला नहीं हॉट. उपरसे परिवार वाले उन्हें कानून से बचने में मदद करते है. यहकी पुलिसभी राजकीय लोगोकी सेवा और सुरक्षा में लगी रहती है और उसी वजह से जनता की मदद नहीं कर सकती और अगर कोई करना चाहे तो भी उसपे पोलिटिकल दबाव डालकर रोक दिया जाता है.

पर इस सब से जनता बहोत गुस्सेमे थी. और इसबार ये गुस्सा फुटकर बहार निकला. पुरे देशमे इस बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन हो रहे है. लोग बलत्करिओको फान्सिकी सजा देने की मांग कर रहे है. पर ऐसा पर्व्धन भारितीय कानून में नहीं है. लोग कानून में बलात्कारियोके लिए फांसीकी सजा मांग रहे है.

पर कोई भी पोलितिसियन कानूनमें बदलाव लेन की बात नहीं कर रहा. कुछ लोगो तो फान्सिकी सजाको मानव अधिकारों के  खिलाफ मानते है. पर उस समय वो लोग ये बात नहीं सोचते की वो जिसके मानव अधिकारोकी बात कर रहे है उस ने ही किसीकी जीने के अधिकार को छिना है. किसीकी जिंदगी छिनी है. क्या जो भोग बनता है उसके मानव अधिकारोंका हनन नहीं होता? असल में तो ये मानव अधिकार दिखने वाले लोग अपनी प्रसिद्धि के लिए ही ये सब करते है. पर हमें जरुरत है उनको साइडलाइन करने की. उनकी बाते सुने बिना सख्त कानून बनाने की. बलात्कार जैसे मामलो में हमें आरब देशो जैसी सजा अपनानी चाहिए. तभी इन हेवानोको कुछ असर होगा.

पर यहाँ भारतमे ऐसा नहीं होगा, ये बात वो हेवान जानते है और इसलिए इतने प्रदर्शन के बावजूद इस देश और दिल्हिमे बलात्कार हो रहे है. स्त्रिओके अधिकारोके मामले में हम बहुत पीछे है.

जिस देशमे सीता की पूजा होती है उसी देश में कई सीताऐ  रोती है. जहा द्रोपदी के सन्मान के लिए महाभारत खेला गया था वहा हर रोज कई औरतो मारा जाता है. दहेज़की वजहसे आजभी कितनी औरतो जलाई जाती है.लाखो लडकिया जन्म से पहले से मरी जाती है. आजभी कई लडकिआ दुनिया के उस सबसे पुराने व्यवसाय में धकेली जाती है जहा पे देह के नाम पे लाखो  जिंदगियो का सौदा होता है. और मेरे मत अनुसार ऐसा सिर्फ दो वजह से होता है:

(१) ये समाज पुरुष प्रधान है जिसमे  लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए हेवानो को बचाते है.
(२) खुद औरत इस सब में इर्षा और स्वार्थ की वजह से हेवानो का साथ देती है.

:: तेजश पटेल ::

kuch khushi dhundhane chala tha mein…

kuch khushi dhundhane chala tha mein..
andhere me roshani dhundhane chala tha mein…

parayi si duniya me apno ko dhndh raha tha mein..
bina roshani ke parchayi dhundh raha tha mein..

apne sapno ko hasil karna chahata tha mein.
bina ankhe duniya dekhna chahta tha mein…

do pal ki hasi ko pana chahta hu mein,
is jivan ko ek nai jindagi dena chahta hu mein..

Author :  Tejash Patel.